पंजाब की राजनीति में मंगलवार को उस वक्त सबसे बड़ा भूचाल आ गया, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) राजबीर सिंह घुम्मन सहित छह लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली。 पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के कड़े रुख और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट के आधार पर की गई इस कार्रवाई के बाद सीबीआई की टीमों ने चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री के सेक्टर-2 स्थित कैंप ऑफिस (कोठी नंबर 50) और ओएसडी घुम्मन के ठिकानों सहित जालंधर, मोहाली, पटियाला, लुधियाना, गुरदासपुर और संगरूर में कुल 8 जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की。 इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' से पंजाब से लेकर दिल्ली तक की सियासत पूरी तरह गरमा गई है。 एफआईआर में चौंकाने वाले खुलासे: सरकारी नीतियों के ड्राफ्ट लीक करने का आरोप सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक, आरोपी सार्वजनिक सेवकों और उनके बिचौलियों पर आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग को प्रभावित करने और बदलने का गंभीर आरोप है。 इसके अलावा, भारी वित्तीय लाभ (रिश्वत) के बदले सरकारी टेंडर की शर्तों में हेरफेर, प्रशासनिक मंजूरियों, हथियारों के लाइसेंस जारी करने, लैंड-यूज कन्वर्जन (CLU) और राजस्व मामलों में गड़बड़ी के पुख्ता इनपुट्स मिले हैं。 सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि आरोपी अधिकारी सरकारी नीतियों और आदेशों के आधिकारिक तौर पर जारी होने से पहले ही उनके ड्राफ्ट निजी व्यक्तियों (बिचौलियों) को लीक कर देते थे。 जांच एजेंसी ने छापेमारी के दौरान लैपटॉप, मोबाइल और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं。 हाईकोर्ट की फटकार के बाद शुरू हुआ एक्शन दरअसल, यह पूरा मामला तब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंचा जब पंजाब पुलिस ने ईडी द्वारा 3 अगस्त को सौंपे गए इनपुट्स पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया。 हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य पुलिस की ढीली कार्रवाई और ओएसडी को शुरुआती जांच में शामिल न करने पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया था。 कोर्ट ने इसे उच्च सार्वजनिक पद से जुड़ा बेहद संवेदनशील मामला मानते हुए सीबीआई को तुरंत एफआईआर दर्ज करने और 2 महीने के भीतर सीलबंद रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था。 "बीजेपी बौखला गई है, चुनाव की तैयारी कर रही": सीएम भगवंत मान सीबीआई की इस धमक पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया (X) पर तीखा पलटवार करते हुए कहा, "भाजपा ने पंजाब चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी हैं。 मेरे कैंप ऑफिस पर सीबीआई की रेड कराई गई है。 अब पंजाब सरकार और मुझे बदनाम करने के लिए ईडी और सीबीआई का जमकर दुरुपयोग किया जाएगा。 पंजाब की जनता से मुझे जो प्यार और समर्थन मिल रहा है, उससे भाजपा पूरी तरह बौखला चुकी है।" वहीं, दिल्ली से आप (AAP) सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने भी इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए केंद्र पर हमला बोला है。 विपक्ष का चौतरफा हमला, बाजवा बोले– 'रिमोट控制' का हश्र देखिए सीबीआई के इस एक्शन के बाद विपक्षी दल मान सरकार पर टूट पड़े हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो स्थान कभी दिल्ली से पंजाब सरकार के रिमोट कंट्रोल संचालन का अड्डा माना जाता था, आज वहां भ्रष्टाचार की जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियां बैठी हैं। वहीं पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त वरिष्ठ नेताओं ने इसे पंजाब के खजाने की लूट करार देते हुए कहा कि ईमानदारी का ढोल पीटने वाली सरकार के सबसे बड़े दफ्तर में भ्रष्टाचार का नेक्सस चल रहा था。 विपक्ष ने मुख्यमंत्री से नैतिकता के आधार पर तुरंत इस्तीफे की मांग की है। हालांकि, मान सरकार ने फेडरलिज्म का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश के खिलाफ त्वरित सुनवाई की अपील की है, जिस पर जल्द सुनवाई हो सकती है。